
हजारीबाग के वन क्षेत्र से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। लंबे समय से कम होते जा रहे गिद्ध अब इस इलाके में दोबारा बड़ी संख्या में दिखाई देने लगे हैं। महावर पहाड़ के साथ-साथ कपका-कुरचुनोबेडो पुल के आसपास इन पक्षियों के झुंड देखे गए हैं। जंगल में गिद्धों की बढ़ती मौजूदगी को स्थानीय स्तर पर प्रकृति के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

डीएफओ मौन प्रकाश के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में वन क्षेत्र के कई हिस्सों में गिद्धों की गतिविधियां बढ़ी हैं। निगरानी के दौरान वयस्क गिद्धों के अलावा छोटे आकार और कम उम्र के पक्षी भी नजर आए। वन विभाग के लिए यह पहलू खास महत्व रखता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि गिद्ध इस क्षेत्र में लगातार आ-जा रहे हैं और यहां उन्हें अनुकूल परिस्थितियां मिल रही हैं।
महावर पहाड़ को गिद्धों के पुराने ठिकानों में गिना जाता है। पहाड़ और उसके आसपास फैला वन क्षेत्र इन पक्षियों को भोजन और सुरक्षित बैठने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराता है। कम उम्र के गिद्धों की मौजूदगी से यह संभावना भी बन रही है कि आसपास इनके प्रजनन स्थल हो सकते हैं।
अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है तो बरकट्ठा क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में आने वाले वर्षों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे क्षेत्र की जैव विविधता को भी लाभ मिलेगा।

कुछ दशक पहले तक भारत में गिद्धों की संख्या बहुत अधिक थी। लेकिन बाद में इनकी आबादी में तेजी से गिरावट आने लगी। पशुओं के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनाक दवा को इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में शामिल किया गया। मृत पशुओं के शरीर में इस दवा के अवशेष रहने पर उन्हें खाने वाले गिद्धों के लिए यह जानलेवा साबित होती थी।
इसके साथ जंगलों का कम होना और भोजन के प्राकृतिक स्रोतों में कमी ने भी गिद्धों के अस्तित्व पर असर डाला। कई इलाकों में इनकी आबादी में करीब 99 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। परिणामस्वरूप कभी बड़ी संख्या में दिखाई देने वाले गिद्ध बेहद दुर्लभ हो गए।

भारत में गिद्धों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाला गिद्ध, पतली चोंच वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध गंभीर संरक्षण संकट का सामना कर रहे हैं।
गिद्धों को प्रकृति का प्राकृतिक सफाईकर्मी कहा जाता है। मृत जानवरों के शवों को खाकर ये जंगल और खुले क्षेत्रों को साफ रखने में मदद करते हैं। इससे सड़ते शवों से फैलने वाले संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
ऐसे में बरकट्ठा में गिद्धों की संख्या बढ़ना सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी की बात नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।
गिद्धों के संभावित आवास को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने स्थानीय लोगों से सहयोग मांगा है। ग्रामीणों से जंगल में अवैध कटाई, शिकार या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है।
अधिकारियों ने अपील की है कि यदि किसी ग्रामीण को जंगल में गिद्धों का घोंसला या बड़ी संख्या में इन पक्षियों का जमावड़ा दिखाई देता है, तो इसकी जानकारी वन विभाग को दी जाए। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां संरक्षण के उपाय किए जा सकेंगे।









