
झारखण्ड स्टेट ब्यूरो : रामकृष्ण मेहता की रिपोर्ट,
झारखण्ड सरकार द्वारा नौकरी से हटाये जाने के बाद पदाधिकारियों व कर्मियों ने आंदोलन शुरु कर दिया है. सरकारी कर्मियों ने बुधवार को प्रोजेक्ट भवन के गेट पर प्रदर्शन किया. उन्होंने नारा लगाया- इंसाफ दो या फांसी दो. यह नारा हुए सभी प्रोजेक्ट बिल्डिंग के भीतर भी चले गए. नौकरी से हटाये जाने के बाद
सरकार द्वारा नौकरी से हटाये जाने के बाद पदाधिकारियों व कर्मियों ने आंदोलन शुरु कर दिया है. सरकारी कर्मियों ने बुधवार को प्रोजेक्ट भवन के गेट पर प्रदर्शन किया. उन्होंने नारा लगाया- इंसाफ दो या फांसी दो. यह नारा हुए सभी प्रोजेक्ट बिल्डिंग के भीतर भी चले गए. नौकरी से हटाये जाने के बाद सहायकों ने प्रोजेक्ट के बाहर धरना शुरु किया है.
तेज बारिश के बीच भी ये अभ्यर्थी रातभर प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहे. क्योंकि सवाल अब पूरी जिंदगी का है. उनका साफ कहना है कि या तो हमें इंसाफ दो या फांसी दे दो. पहले तो ये सभी प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना दे रहे थे, लेकिन अब ये लोग परिसर में घुस गये हैं और वहीं लगातार नारेबाजी कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि छात्रों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने जेपीएससी व जेएसएससी के उन परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, जिसकी नियुक्ति में टीडीपीएल शामिल था. इसके साथ ही सरकार ने साल 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच व समीक्षा करने का आदेश दिया है.
सफल अभ्यर्थियों व नौकरी से हटाये गये लोगों का कहना है कि उनकी गलती नहीं है. उनकी नियुक्ति में गड़बड़ी नहीं हुई है. अगर किसी की नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है, तो सरकार उसे सजा दे. लेकिन जिन युवकों ने मेहनत के बल पर सफलता हासिल की है, उसे सजा क्यों दी जा रही है.
धरना दे रहे कुछ सहायकों का कहना है कि उन्होंने नौकरी से त्याग पत्र देकर झारखंड में काम करने का रास्ता चुना. मेहनत की. परीक्षा दी. इंटरव्यू दिया और हमें नौकरी मिली. हमें झारखंड में काम करने का मौका मिला, लेकिन अब सरकार छात्रों के दवाब में आकर हमें बेरोजगार बना रही है. हमारे साथ अन्याय हो रहा है.









