
, ब्यूरो रिपोर्ट,
धनबाद : झारखंड के क्रिकेट गलियारों में इन दिनों एक नया जोश और उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसकी मुख्य वजह दलीप ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा खिलाड़ी कुनैन कुरैशी और झारखंड के कप्तान ईशान किशन की नेतृत्व क्षमता है। पूर्व DCA सचिव एस ए रहमान मानना है कि जी धोनी के दौर की तरह अब एक बार फिर झारखंड के युवाओं के लिए राष्ट्रीय पटल पर चमकने के नए रास्ते खुल गए हैं।

रहमान ने आगे कहा कि कुनैन कुरैशी ने हाल ही में अंडर-23 मुकाबलों में लगभग 470 से अधिक रन बनाने के साथ-साथ 27 विकेट झटककर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। हालांकि टीम संयोजन और कुछ परिस्थितियों के चलते उन्हें शुरुआती मौकों के लिए इंतजार करना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई। फाइनल मुकाबले में उनके शानदार प्रदर्शन और बंगाल के खिलाफ शाहबाज अहमद जैसे खिलाड़ियों के साथ उनकी खेल शैली ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा कभी छुपती नहीं है। इस सफलता से धनबाद और पूरे झारखंड के युवा क्रिकेटरों में यह संदेश गया है कि कड़ी मेहनत का फल हमेशा मिलता है और आने वाले दिनों में धनबाद से कई और प्रतिभावान खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी और राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।
इस पूरी सफलता के पीछे झारखंड के कप्तान ईशान किशन की भूमिका की भी जमकर सराहना की जा रही है। शुरुआती 15 सदस्यीय चयन सूची में न होने के बावजूद, कप्तान ने कुनैन कुरैशी पर भरोसा जताया और उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका देकर यह साबित कर दिया कि एक अच्छा कप्तान हमेशा अपने राज्य के हुनरमंद खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का दम रखता है। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को अपनी कप्तानी और फाइनल में शतकीय पारी के दम पर चैंपियन बनाने वाले ईशान किशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे ‘लीड फ्रॉम द फ्रंट’ की मिसाल हैं।
विशेषज्ञों और रहमान का मानना है कि जिस प्रकार 2007 में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने टी-20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था, उसी प्रकार मौजूदा समय में ईशान किशन को भारतीय टी-20 टीम की कमान सौंपना एक बेहतरीन फैसला साबित हो सकता है। कुनैन कुरैशी का संघर्ष और ईशान किशन का दूरदर्शी नेतृत्व झारखंड के क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है, जिससे धनबाद के उभरते हुए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का एक मजबूत हौसला मिला है।









