
, ब्यूरो रिपोर्ट,
धनबाद : विधायक संजीव सिंह के करीबी राजीव रंजन सिंह, जिसे रंजय सिंह भी कहा जाता है, के साथ हुआ हत्याकांड के बाद, लगभग नौ साल के बाद, अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया। धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी के समक्ष, आरोपी हर्ष सिंह और नंद किशोर सिंह (उर्फ मामा) को रंजय सिंह की हत्या और राजा यादव पर जानलेवा हमले के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, आयुष श्रीवास्तव और सिद्धार्थ शर्मा ने पैरवी की।

29 जनवरी 2017 को रंजय सिंह की हत्या हुई।
रंजय सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम लगभग 5:30 बजे धनबाद के बिग बाजार के पास चाणक्य नगर मोड़ पर हुई। वह चाणक्य नगर के अपने फ्लैट से दूध का बर्तन लेकर सिंह मेंशन की ओर जा रहे थे।

रिपोर्ट है कि रामेश्वर तिवारी के घर के पास घात लगाए हुए दो बाइक सवार ने रंजय सिंह पर तेज़ फायरिंग की। गोलीबारी में रंजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें आनन-फानन के सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।


रंजय सिंह के साथ स्कूटी पर सवार राजा यादव भी इस हमले में बाल-बाल बच गए। राजा यादव के बयान पर प्राथमिकी दर्ज हुई।
घटना के बाद, 30 जनवरी 2017 को, राजा यादव के बयान पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस की जाँच के दौरान, राजा यादव द्वारा बनवाए गए स्केच के आधार पर कथित शूटरों की पहचान हुई।

नंद किशोर सिंह 2018 से जेल में बंद था।
मामले में नंद किशोर सिंह (उर्फ मामा) 8 अगस्त 2018 से जेल में बंद था। 5 नवंबर 2018 को, सरायढेला थाना प्रभारी निरंजन तिवारी ने नंद किशोर सिंह को कथित शूटर बताते हुए उसके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
वहीं, चंदन शर्मा और हरेंद्र सिंह के खिलाफ जांच जारी रही।
बाद में, 11 दिसंबर 2025 को पुलिस ने चंदन शर्मा को फरार बताकर उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। चंदन शर्मा फिलहाल पुलिस के हाथों से बाहर है, और उसकी अनुपस्थिति में इस मामले की सुनवाई चल रही है।
नौ वर्ष की सुनवाई के बाद फैसला आया।
रंजय सिंह हत्याकांड की सुनवाई लगभग नौ वर्षों तक चली। शनिवार को अदालत ने हर्ष सिंह और नंद किशोर सिंह को हत्या और राजा यादव पर जानलेवा हमले के आरोपों से बरी किया।
अदालत ने दोनों को संदेह का लाभ दिया। फैसले के बाद, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित आरोपियों और अन्य लंबित कार्यवाहियों के अनुसार जारी रहेगी।









