
मंदिर और स्कूल के लिए परिवार ने जमीन की दान, बाकी हिस्से पर कब्जे की शिकायत; डीसी कार्यालय के निर्देश पर सदर सीओ की मौजूदगी में हुई नापी

हजारीबाग। सदर अंचल क्षेत्र के चानो गांव में सैनिक परिवार के नाम बंदोबस्त जमीन पर कथित अतिक्रमण और कब्जे का मामला अब कार्रवाई की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले को लेकर उपायुक्त कार्यालय के स्तर से जमीन की जांच और नापी का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सदर अंचलाधिकारी की मौजूदगी में संबंधित जमीन की नापी कराई गई है। सूत्रों के मुताबिक नापी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जल्द ही मामले में नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी है।

257 डिसमिल जमीन का मामला
सूत्रों के अनुसार, चानो के खाता नंबर 15 और प्लॉट नंबर 186 में कुल 2 एकड़ 57 डिसमिल यानी 257 डिसमिल जमीन दर्ज है। बताया जाता है कि यह जमीन पूर्व में जयवंत भेंगरा के नाम बंदोबस्त की गई थी। जमीन के वर्तमान इस्तेमाल और अलग-अलग हिस्सों पर हुए निर्माण को लेकर ही विवाद सामने आया है।

मंदिर और स्कूल की जमीन परिवार ने दी
मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि जमीन के कुछ हिस्से पर मौजूद मंदिर और स्कूल को अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बंदोबस्तधारी परिवार की ओर से करीब 30 डिसमिल जमीन मंदिर के लिए तथा लगभग 12 डिसमिल जमीन स्कूल के लिए दान की गई थी। इसके अलावा करीब एक एकड़ हिस्से में परिवार के रहने की जानकारी है।

बाकी जमीन पर कब्जे का आरोप
विवाद मुख्य रूप से उस जमीन को लेकर है, जो इन उपयोगों के बाद बचती है। आरोप है कि शेष हिस्से पर दूसरे लोगों ने धीरे-धीरे कब्जा कर लिया और कई जगह पक्के निर्माण भी कर लिए गए। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि बंदोबस्तधारी के नाम दर्ज जमीन पर दूसरे लोगों का कब्जा किस आधार पर हुआ और निर्माण कैसे किए गए।

नापी के बाद कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों की मानें तो मामले को लेकर उपायुक्त कार्यालय के स्तर से संज्ञान लिया गया और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए नापी कराई गई। सदर सीओ की मौजूदगी में हुई नापी के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड और स्थल की स्थिति का मिलान किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रक्रिया पूरी होते ही कथित अतिक्रमण को लेकर जल्द कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि और अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही जमीन पर कब्जे की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।









